श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर सर्वे की याचिका SC ने खारिज की कोर्ट ने कहा-हाईकोर्ट का मामला है, वहीं चलाएं; ज्ञानवापी की तरह सर्वे चाहते थे याचिकाकर्ता

मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह विवाद पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ये हाईकोर्ट का मामला है, वही चलाया जाए।
SC rejected the petition for survey on Shri Krishna Janmabhoomi, the court said - it is a matter of High Court, let it be conducted there.
SC rejected the petition for survey on Shri Krishna Janmabhoomi, the court said - it is a matter of High Court, let it be conducted there.22/09/2023

SC ने कहा कि मुकदमों के ट्रांसफर के सभी सवालों पर HC सुनवाई कर रहा है, हम अभी मामले में दखल नहीं देंगे।

सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने की सुनवाई
दरअसल, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में वकील सार्थक चतुर्वेदी हैं। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस शुधांशु धूलिया की बेंच सुनवाई की।

1968 में हुआ समझौता दिखावा और धोखाधड़ी
याचिका में कहा गया है कि मस्जिद ईदगाह का निर्माण कथित तौर पर हिंदू मंदिरों को ध्वस्त करने के बाद किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस तरह के निर्माण को मस्जिद नहीं माना जा सकता। ट्रस्ट 1968 में हुए समझौते की वैधता के खिलाफ तर्क देते हुए इसे दिखावा और धोखाधड़ी बता रहा हैं।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी, जिनमें शाही मस्जिद ईदगाह प्रबंधन समिति जैसी उल्लेखनीय संस्थाएं शामिल हैं। संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल रहे हैं। विशेष रूप से ऐसे तत्व जो हिंदुओं के लिए धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखते हैं।

स्तंभ और प्रतीकों को पहुंचाया जा रहा नुकसान
ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष पांडे का दावा है कि उत्तरदाताओं ने मंदिर के स्तंभों और प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया है और जनरेटर का उपयोग किया है। जिससे दीवारों और स्तंभों को और अधिक नुकसान हुआ है। उन्होंने परिसर में होने वाली नमाज और अन्य गतिविधियों पर भी चिंता जताई है। याचिकाकर्ता ने संपत्ति पंजीकरण में विसंगतियों के बारे में भी चिंता जताई है। उनका तर्क है कि भूमि को आधिकारिक तौर पर 'ईदगाह' नाम के तहत पंजीकृत नहीं किया जा सकता है। यह बताते हुए कि इसका कर कटरा केशव देव, मथुरा के उपनाम के तहत एकत्र किया जा रहा है।

ज्ञानवापी सर्वेक्षण की तरह हो शाही ईदगाह का भी सर्वेक्षण हो

सुप्रीम कोर्ट के वकील सार्थक चतुर्वेदी ने बताया कि याचिकाकर्ता विवादित भूमि की पहचान, स्थान और माप की स्थानीय जांच की मांग करता है। जिसमें दोनों पक्षों द्वारा किए गए दावों को प्रमाणित करने के लिए एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण की आवश्यकता है। याचिका कर्ता का अनुरोध है कि ज्ञानवापी सर्वेक्षण की तरह इस स्थल का भी सर्वेक्षण हो जिससे इस स्थल के ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व का पता लग जायेगा । याचिकाकर्ता की याचिका में न केवल उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने की अनुमति मांगी गई है, बल्कि SLP में अंतरिम एकपक्षीय रोक लगाने का भी अनुरोध किया गया है।

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