वैक्सीन की कमी है’, हालात गंभीर हैं

वैक्सीन की कमी है’, हालात गंभीर हैं

▪️ये सरकार स्थिति को संभालने की बजाय और बिगाड़ रही है!

महाराष्ट्र देश में आई कोरोना वायरस की दूसरी लहर का मुख्य गढ़ बन गया है। वर्तमान समय में जितने केस देश के अन्य राज्यों से सामने आ रहे हैं, लगभग उतने ही केस अकेले महाराष्ट्र से आ रहे हैं। ऐसे में महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे कोरोना की वैक्सीन को लेकर पैनिक फैला रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में कोरोना की वैक्सीन का स्टॉक मात्र तीन दिन का ही बचा है, जबकि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने साफ कर दिया है कि देश में कहीं भी कोरोना वैक्सीन की कमी नहीं है।

कोरोना को लेकर पिछले साल भर में अपनी विफलताओं का पुलिंदा लेकर बैठी महाराष्ट्र सरकार अब वैक्सीन के स्टॉक को लेकर जनता के बीच डर फैला रही है, जबकि इस वक्त उसका मुख्य काम अपने मैनेजमेंट को मजबूत करना होना चाहिए। महाराष्ट्र में प्रतिदिन कोरोना के 60 हजार से ज्यादा मामले सामने रहे हैं, जो दिखाता है कि कोरोना को कंट्रोल करने में महाराष्ट्र सरकार पूरी तरह विफल हो रही है। इन परिस्थितियों के बीच वैक्सीनेशन को लेकर महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि राज्य में तीन दिन से ज्यादा वैक्सीन का स्टॉक नहीं है। केन्द्र से इस बाबत वैक्सीन की मांग की गई है, क्योंकि वैक्सीन का डोज लेने आए लोगों को वापस भेजा जा रहा है।

राजेश टोपे ने वैक्सीन के मुद्दे पर कहा, "राज्य के कई टीकाकरण केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन नहीं है। इसलिए वैक्सीनेशन कराए बिना ही लोगों को वापस भेजा जा रहा है। केंद्र सरकार से मांग की गई है कि 20-40 साल के लोगों को भी टीका लगाया जाना चाहिए, जिससे प्रदेश में कोरोना की रफ्तार पर लगाम लग सके।" साफ है कि वह वैक्सीन को लेकर सारा ठीकरा केन्द्र सरकार पर फोड़कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, जो कि एक आपत्तिजनक बात है।

वहीं महाराष्ट्र सरकार द्वारा वैक्सीन को लेकर आए इस बयान के बाद केन्द्र की तरफ से महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा, "किसी राज्य में वैक्सीन की कमी नहीं है। राज्यों को जरूरत के हिसाब से वैक्सीन दी जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में वैक्सीन की कमी नहीं होने देंगे।"

उन्होंने कहा, "कोरोना के नियंत्रण के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा जिम्मेदारी से कार्य न करना समझ से परे है। वैक्सीन आपूर्ति की निगरानी लगातार की जा रही है और राज्य सरकारों को इसके बारे में नियमित रूप से अवगत कराया जा रहा है। इसके बावजूद लोगों में दहशत फैलाना मूर्खता है।" स्वास्थ्य मंत्री का बयान दर्शाता है कि देश में कोरोना वैक्सीन की कमी नहीं है।

ऐसे में महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे को लेकर कुछ सवाल खड़े होते हैं, जो उनकी सिलसिलेवार नाकामियों का संकेत देते नजर आ रहे हैं। महाराष्ट्र कोरोना वायरस का गढ़ बन चुका है, यहां कोरोना के सबसे ज्यादा मामले और सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं। पिछले एक साल में इस स्थिति में तनिक भी बदलाव नहीं आया है, क्योंकि देश में लगभग आधे कोरोना केस महाराष्ट्र से ही आए हैं। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि कोरोना वायरस को लेकर महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार का मैनेजमेंट सबसे बुरा रहा है।

बुरे मैनेजमेंट के बीच अब कोरोना वैक्सीन को लेकर राजेश टोपे का बयान दर्शाता है कि महाराष्ट्र सरकार, जिसे पहले खुद की नीतियों पर सुधार कर कोरोना को कंट्रोल करना चाहिए, वो वैक्सीन के स्टॉक का डर फैलाकर लोगों में असमंजस की स्थितियां पैदा कर रही है। केन्द्र सरकार कोरोना वैक्सीन को लेकर पहले ही साफ कर चुकी है कि देश के किसी भी राज्य में कोरोना वैक्सीन की कमी नहीं है।

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